मैंने यह सोचा, मैंने वह सोचा, शब्द ही सोच को आवाज़ देते हैं
सोच सात आसमानो से भी परे है, सात सागरों से भी तले है
धरती में पाताल सी गहराई है, स्वर्ग से परे उड़ चले, सब्द ही
परिंदों को परवाज़ देते हैं
बेशकीमती, आलिशान, चमक-दमक, मेरे सारे सपने, शब्द ही इनकी पूर्णता को आगाज़ देते हैं
सब लिख दिया, सब उकेर दिया कलम ने कागज पर, क्यों की शब्द ही सोच को सच्चा साज़ देते हैं
शब्द ही सोच को आवाज़ देते हैं
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