बच्चो मे बढ़ता तनाव व घटता आत्मविश्वास

आज के परिवेश मे बच्चे ज्यादातर परेशानियो के शिकार है। क्योकि उन्हे इस प्रतिस्पर्धात्मक विकास के दौर मे कई कठिनाईयो का सामना करना है। कई बच्चे माता पिता की इकलौती संतान है। वे भाई बहनो के साथ के लिए और प्यार के लिए तरसते है। कई परिवारो मे तो एकल अभिभावक होते है अपने व्यवसाय और कार्य मे ज्यादातर व्यस्त रहते है, जिसके चलते बच्चे के मनोभाव अंजाने मे अनदेखे कर दिए जाते है। छोटी – छोटी व्यवहार संबंधित समस्याएँ भयंकर रुप मे सामने आती है। उदाहरण तनाव, नशे की लत, गलत संगत, स्कूल ड्रोॅपआउट, संस्कार हिनता। इसके चलते स्कूलो मे, कॉलेजो मे, और अन्य शिक्षा संस्थानो मे कॉन्सिलिंग की अनिवार्यता बढ़ती जा रही है।निरंतर परिवर्तनशील सांसारिक, पारिवारिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक परिवेश मे लोगो की जीवनशैली मे, विचारो मे, संस्कारो मे, व्यवहारो मे कई प्रत्यक्ष परिवर्तन आए है। इन परिवर्तनो का सीधा प्रभाव मनुष्य जीवन के हर आयु वर्ग और सामाजिक स्तर पर पड़ा है। परंतु सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हुए है। इन परिस्थितयो को अत्यंत महत्वपूर्ण समझे, अन्यथा हमारा भविष्य अंधकार मे है। क्योकि बच्चे ही हमारा उज्जवल भविष्य है।

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