फारसी समुदाय
साइरस महान ने मेडियन और अन्य जनजातियों को संगठित कर ५५० ईसा पूर्व में फ़ारसी साम्राज्य की नीव रखी जिसके बाद फ़ारसी धर्म का प्रभाव तेजी से बढ़ा |
फारसियों (पारसी धर्म /जोरेस्ट्रियन ) के उदय से पूर्व ईरान में मुख्य रूप से एलामी सभ्यता का अधिपत्य था इसके अतिरिक्त आर्यन जनजातियों मेडियन, पार्थियन और अन्य स्वदेशी जनजातियां वहां वास करती थीं | यह समय इंडो -आर्यन सभ्यता और बहुदेववादी धर्म मिथ्रा से प्रभावित थे |
फ़ारसी धर्म से पूर्व यहाँ के लोग मिथ्रा, अग्नि और प्रकृति की पूजा करते थे | जो की वेदों से मिलती-जुलती थी पूर्व में फ़ारसी लोगों की प्रमुख सभ्यता का नाम अचमेदिन साम्राज्य था, इसे प्रथम फ़ारसी साम्राज्य कहा जाता था |
अचमेदिन सभ्यता से पूर्व में इस छेत्र में एलामी और मेंडेस सभ्यताऐ मुख्य थीं |
७ वीं शताब्दी में लगभग (६३३- ६५१ ) ईसवी में अरब आक्रमणकारियों के आगमन के साथ ईरान में इस्लाम धर्म का आगमन हुआ था | सासानी नामक साम्राज्य को हराकर याशीदुन खलीफाओं ने मुस्लिम शासन की स्थापना की थी | इस समय ईरान के लोग जरावोशत से इस्लाम में परिवर्तित होने लगे थे | उस समय ईरान में मुख्यतः ९०० वर्षों तक सुन्नी इस्लाम का बहुत अधिक वर्चस्व था |
फारस में मुख्य पैगम्बर या उनके धर्म गुरु जरथुष्टत्र थे | फारस के लोगों को धार्मिक उत्पीड़न से बचाकर उनका मार्गदर्शन करते हुए भारत लाये| इन धर्म गुरु ने अहुरा माज़दा के एकईश्वरवाद के सन्देश का प्रचार किया | अहुरा माज़्दा को बुद्धिमान, सर्वोच्च सर्वव्यापी और इस सारी सृस्टि के रचयिता मन जाता है | फ़ारसी लोग एकेश्वरवादी हैं वे अग्नि को पवित्र मान कर अहुरा माज़्दा की पूजा करते हैं |
भारत में वे ईरान से पलायन करके गुजरात के संजान क्षेत्र के स्थानीय राजा जादी राणा के पास पहुंचे थे | उन्होंने ने ही फ़ारसी शरणार्थियों को गुजरात में बसने की अनुमति दी थी | संजान प्रान्त आज गुजरात राज्य के वलसाड के नाम से जाना जाता है | पारसियों ने राजा जादी राणा के दरबार में दूध से भरे ग्लास में शक्कर मिला कर भारतीय संस्कृति को प्रतिसाद करने का गुण दिखाया था |
फ़ारसी मंदिरों को अतीरा बेहराम या फायर टेंपल कहा जाता है।
इसके संस्थापक को जरायुस्थ्र या जोरोएस्टर कहते है। इसके नैतिक सिद्धांत इसत (अच्छे विचार) हुकत (अच्छी बाते) हुवश्त (अच्छे कर्म) है ।
भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास मे फारसी समुदाय का अकल्पनीय योगदान रहा है । मुख्यतः व्यापार, परोपकार और प्रमुख औधोगिक विकास मे। टाटा, गोदरेज, वाडिया जैसे बड़े- बड़े व्यापारिक घरानो ने भारत के इस्पात, आटोमोबाइल, इलेक्ट्रोनिक और उपभोक्ता वस्तुओ के क्षेत्रों की मजबूती से स्थापित करने में अभूतपूर्व योगदान दिया है | भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूती मे वे सतत अग्रणीय है।
टाटा समूह (जमशेदजी टाटा, रतन टाटा ) ने भारत में बिजली, ऊर्जा, इस्पात, स्वास्थय, औपचारिकता, उड्डयन इत्यादि में अविस्मरणीय योगदान दिया है । गोदरेज (अरदेशीर गोदरेज) ने १८९७ में इलेक्ट्रॉनिक, रसायनो एवं उपभोक्ता वस्तुओ मे क्रांति ला दी थी ।
फारसी समुदाय ने मुंबई में कपास मिलों मे, मुंबई मे बन्दरगाहो के विकास, जहाज निर्माण एवं मुंबई के कई व्यवसायिक केन्द्रो मे उच्च स्तरीय निवेश किया है, भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डा होमी भाभा का योगदान कोई भी भुला नही सकता है। फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ (सैम बहादुर) का योगदान १९७१के भारत -पाकिस्तान युद्ध मे अविस्मरणीय है। इस प्रकार से भारत को प्रगतिशील बनाने मे इस समुदाय का योगदान सर्वोत्कृष्ट है। इस समुदाय का नाम फारसी, फारस की खाङी की वजह से पडा।