महर्षि वाल्मिकी
भारत वर्ष के सर्वप्रथम कवि-आदिकवि महर्षि वाल्मीकि को माना जाता है| जिन्होंने विश्व के सर्व प्रथम महाकाव्य की रचना की थी | उन्होंने संस्कृत में अपने इस महाकाव्य की रचना की थी | जिससे उन्हें सर्वप्रथम काव्य रचनाकार का गौरव प्राप्त है |
ऐसा माना जाता है की रामायण के घटित होने से पूर्व ही महर्षि वाल्मिकी ने रामायण की रचना महाकाव्य के रूप में कर दी थी |
उनका नाम वाल्मीकि से पूर्व रत्नाकर था | परन्तु नारद जी की प्रेरणादायक मार्गदर्शन में उन्होंने भगवान की अथक तपस्या की और इस दौरान उनके सम्पूर्ण शरीर पर चीटियों ने अपना घर बना दिया था, जिसे वाल्मीकि कहते है, इससे उनका नाम महर्षि वाल्मिकी पड़ा |
राम भक्ति को प्रेरणा मान कर उन्होंने इस महाकव्य की रचना रामायण की रचना, रामायण घटित होने से पूर्व कर दी थी | उन्होंने नारदजी से राम कथा का श्रवण किया और अपनी दिव्य दृष्टि से उसे घटित होने से पूर्व देख लिया था | तमसा नदी के तट पर क्रोंच पक्षी की करुणं गाथा से प्रेरणा पाकर २४००० श्लोकों वाले महाकाव्य रामायण की रचना की |
मा निषाद प्रतिष्ठा त्वमनमह शाश्वती समा ……रामायण के पहले छंद के श्लोक बने |
एक शिकारी ने तमसा नदी में प्रेमालाप करते क्रोंच पक्षी के जोड़े में से नर पक्षी को तीर से मार दिया| अपने नर साथी की मृत्यु पर मादा क्रोंच पक्षी के करुणं रुदन विलाप से महर्षि करुणा से द्रवित हो उठे और रामायण के सर्वप्रथम श्लोकों का सृजन हुआ |