महर्षि गोस्वामी तुलसीदासजी

वाल्मीकी ऋषि के बाद भारतीय साहित्य में अविस्मरणीय योगदान गोस्वामी तुलसीदास जी का है । गोस्वामी तुलसीदास जी को भक्तिकाल में सगुण भक्ति काव्य धारा में और रामभक्ति शाखा के प्रधान या प्रमुख कवी माना जाता है। श्री रामचरितमानस हिंदी का सर्व प्रसिद्ध महाकाव्य है । जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में किया है। इसे आज भी घर-घर में पढ़ा जाता है। उन्होंने कई रचनाओं का सृजन किया है, उनमे प्रमुख है – कवितावली, विनयपत्रिका, गीतावली, दोहावली, पार्वती मंगल , जानकी मंगल । उनकी सभी रचनाओं ने समाज को प्रेरित करके नयी दिशा दी है। हनुमानचालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने १६ वी शताब्दी में की थी । यह अवधी भाषा में लिखी गयी थी । हनुमान चालीसा को तुलसीदास जी ने ४० दिनों में अकबर की कैद में रहने के दौरान लिखा था जिसके बाद उन्हें कैद से मुक्त कर दिए गया था ।वाल्मीकि रामायण संस्कृत भाषा में एक महाकाव्य के रूप में रची गयी थी परन्तु तुलसीदास ने रामचरितमानस को अवधी भाषा में कथा रूप (चौपाई-दोहा शैली ) में रचित किया। यह महाकाव्य २४००० श्लोकों वाला अवधि भाषा में लिखा गया था जो कि त्रेता युग की घटनाओं पर आधारित है।वाल्मीकी रामायण में रामजी को मर्यादापुरुषोत्तम (मानवीय गुणों वाले) महापुरुष के रुप मे दर्शाया है। जब कि रामचरितमानस में रामजी को भगवान (भक्तिभाव) के रुप में दर्शाया है। गोस्वामी तुलसीदास रामजी के अनन्य भक्त थे।बचपन में उनका नाम ‘रामबोला’ था परन्तु यही रामबोला बड़े होने के बाद गोस्वामी तुलसीदास जी के नाम से विश्व प्रसिद्ध हुए।ईश्वर की भक्ति में कितनी शक्ति होती है, यह इसका बहुत बड़ा उदाहरण है।